आप सोचेंगे कि सीएससी सेंटर से अपडेट कर लेते। तो सीएससी सेंटर का हाल सुने। एक तो एक भी लाइक या कमेन्ट नहीं मिलता है, न ही कोई मेम्बर बनता है (तो न कोई मेम्बर की पेमेंट मिली), न कोई कस्टमर बना (ट्रैवेल, जिसके, म्युचुअल फंड में निवेश, इत्यादि), शेयर मार्केट में जो ट्रेड लगाया उसी का भाव गिरा, उसपर कहीं भी जाएँ तो जैसे लोग जानते हों या तैयारी करी हो कि क्या कहना है, तो सीएससी वाले आपसे अटपटे तरीके बताएँ या आपका डाक्यूमेन्ट नम्बर लेकर लाग इन करने के लिए ओटीपी लें और फिर इनवैलिड नम्बर बताएँ या और कुछ एक्सक्यूज दें तो मतलब कुछ तो गडबडी है। ऊपर से एसआईआर की प्रक्रिया हरियाणा में होनी बाकी है। मेरे तो ये डाक्यूमेन्टस् 2002 के बाद के हैं तो क्या अपडेट ब्लाक कर रहे हैं? ऊपर से सुना है इंडिया में हिन्दु-स्तान---पाकि-स्तान बाँट रहे हैं लेकिन इंडिया (भारत) कहाँ है? (क्या इंडिया पलायन में विलुप्त कर दिया?)। कैसी उलझनों में घिरे हुए हैं लोग? तो मैंने ने मेरी वेबसाइट से और साइट एंड साउण्ड के प्रयोग के माध्यम से अपने नए विचारों से दर्शकों और श्रोताओं को अवगत कराया और अनुकूल रिएक्शन भी महसूस किया लेकिन वास्तविकता अभी भी अनुपलब्ध है। तो???????
तो बस, फिर क्या था। मैं अपने लैपटॉप पर उमंग वेबसाइट ओपन करने लगा। मेरे मोबाइल नंबर से लाग इन किया और उसमें उपलब्ध सुविधाएँ देखीं। फिर मेरी नजर प्रोफाइल नाम पर गई और मैं सकपकाया। नाम तो मेरे पुत्र का था जो सिर्फ आठ साल का है। तो मैंने स्पोर्ट नम्बर लिख लिया। अगले दिन मैंने स्पोर्ट नम्बर पर फोन किया और उन्हें मेरी दुविधा बतलाई। तो झट से जवाब मिला कि मुझे आधार कार्ड में नम्बर बदलने होंगे!?!?!?!?!?
अभी कल की ही बात है। मैंने सोचा कि मेरे डिजीलाकर में लाग इन करने की सोची। कई साल पहले मैंने ईमेल से अकाउंट बनाया था लेकिन इस्तेमाल नहीं किया। और फिर शायद मेरी पासवर्ड की बुक भी चोरों के हाथ लग गई। लेकिन मैंने डिजीलाकर इस्तेमाल नहीं किया था तो कभी चेक नहीं किया। कल लाग इन करने के लिए पिन की जरूरत हुई। तो फोर्गोट पिन करके मोबाइल पर ओटीपी माँगा लेकिन गलत डेट आफ बर्थ बतलाई गई। तो आधार कार्ड से कोशिश की, ओटीपी पाकर एन्टर किया लेकिन अकाउंट ओपन होने से पहले ब्लाक हो गया और ब्लाक कार्ड मेरे लैपटॉप स्क्रीन पर अटक गया।
उफ! भारत सरकार (या अंग्रेजी सरकार या हिन्दु-स्तान सरकार या पाकि-स्तान सरकार) इतनी मेहनत करती है और कल ही दिल्ली में एआई सैमिट हुई लेकिन भारत के नागरिक तो जैसे इस च॔द्रलोक के गड्ढों (धोखाधडी, जालसाजी, फरेब और उससे होने वाली अनेक तरीकों की मोटी कमाई) (निष्क्रियता) (हैकिंग और उससे होने वाली अनेक तरीकों की मोटी कमाई) (अनपढ) (अज्ञानता)(इत्यादि) में फँसकर खो जाते हैं (या गुमनाम कर दिए जाते हैं किसी शातिर मकसद के लिए या दुश्मनी की नीयत से) क्योंकि जब उनकी कालरात्री चल रही थी तभी राज-कर्ताओं ने ये सभी अनलाइन प्रपंच भी शुरू किए और अंग्रेजी सरकार या हिन्दु-स्तान सरकार या पाकि-स्तान सरकार में जन समुदाय भी बाँट दिए। अब जैसे भारत में भारतवासी नहीं मिलते हैं।
क्या जरूरत थी कि कालरात्री का समय में यह सभी प्रपंच किए? और भारतवासी कौन कौन हैं? भारत कहाँ लुप्त कर दिया? जो काम विदेशी आक्रांता न कर सके वो अंग्रेजी सरकार या हिन्दु-स्तान सरकार या पाकि-स्तान सरकार ने झटपट कर लिया? Dr Capt InderPal Yadav