यहाँ मैं एक बात स्पष्ट करना चाहूँगा कि ये लेख में व्यक्त विचार मेरे अपने विचार है और किसी पक्ष - प्रतिपक्ष को आधारित करके नहीं व्यक्त किये गए हैं। मेरा भी जिन्दगी का ऐसा ही अनुभव रहा है ओर मैंने मेरे लेखों में ऐसे ही नए विचार बताए हैं और ऐसे ही अन्याय पर सवाल उठाए हैं। लेकिन न तो मुझ तक कोई लाइक्स पहुंचे और न ही कोई कमेंट्स। शायद अंग्रेजी ___ या ___ ने मुझे जनता के सम्पर्क से दूर रखा शायद ये सोच कर की अकेला चना क्या भाड फूंकेगा। वहीं मेरे लेखों से शायद अपना ज्ञान वर्धन किया, शायद धन व्यापार किया। लेकिन अंग्रेजी डेमोक्रेसी और अंग्रेजी राज की सरकारें तो ज्यों की त्यों चलती रहीं।
इसी प्रकार जनता के आंदोलन में भी ऐसे ही अंग्रेजी अपनी अपनी राजनीति की चालें चलने लग जाते हैं और अंग्रेजी का लाभ मतलब स्वराज का नुकसान।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विडियो संदेश किया है तो अनशन और आंदोलन खत्म हुआ है। कितनी अजीब बात है कि कल ही अंग्रेजी पक्ष के नेता फिल्म स्टार सलमान खान ने भी विडियो संदेश भेजा था। जो भी हो, स्वराज के हक में दखल और सौदा नामंजूर होगा।
वैसे इस आंदोलन के लिए निम्नलिखित बातें व्यक्त करना चाहूँगा:
1) फास्ट ट्रैक कोर्ट को ओपन हाउस कोर्ट की तरह चलाएँ और एक अलग चैनल पर लाइव और आफ-टाइम में रिकॉर्डिंग चलाई जाए।
2) देश विदेश के भारतीय अपनी प्रतिक्रिया और सवाल संलग्न कर सकें और उत्तर पा सकें। उपयोगी सवाल कोर्ट में उठाए जा सकें।
3) गोपनीय तथा प्रत्यक्ष गवाही और सबूतों की सुविधा हो।
4) पेपर लीक जिन्दगी भर की कमाई का इंतजाम करता है और इसलिए दोषियों के लिए आकर्षक कमाई का जरिया होता है। तो सजा भी जिन्दगी भर की कमाई जब्त करने की होनी चाहिए और दोषियों को कालेजों में क्लास 4 की नौकरी पर लगा देना चाहिए।
5) अंग्रेजी दोषियों को सुमुल्य भुगतान और नागरिक दोषियों के दोष और जोरा-जोरी (फोर्सड) के अनुसार आंकलन हो।
6) अंग्रेजी संतानें पेपर में, सिलेक्शन में और रोजगार में नागरिकों के हक का हनन न करें। इसी प्रकार अंग्रेजी बिजनेस नागरिकों के बिजनेस का हनन न करें।
7) जब इंडिया एक आजाद देश बनाया है तो इंडिया भारत के मूल निवासियों का देश बनाया है तो मूल निवासी ही इंडिया के नागरिक हैं और बाकी अंग्रेजी। अंग्रेजों ने मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान बनाया लेकिन फिर भी इतने मुस्लिम और शूद्र (हरिजन) उनके देश भेजने की बजाय यहीं के सिटीजन बनाकर अंग्रेजी डेमोक्रेसी बनाई और उन्हें संविधान में विशेष अधिकार भी दिलाए। लेकिन वास्तव में ये अंग्रेजी डेमोक्रेसी के शक्ति स्तंभ रहे।
अंग्रेजी शक्ति ने कई प्रकार की भ्रांतियाँ रची ताकी इंडिया पर अपना शासन अनंत कर सकें लेकिन 1977 के तख्तापलट ने उनकी राजनीति हिला दी और फिर उन्होंने तख्तापलट को गलत बता कर जनता दल को अलग-थलग कर दिया। उसके बाद तो जैसे राजनीति की सीरत ही बदल गई। अंग्रे
जी शक्ति निर्भीक होकर अंग्रेजी डेमोक्रेसी के साथ साथ अंग्रेजी राज भी थोपने लगी। इस कार्य में उन्होंने साइट (दृष्टि) और साउन्ड ( आवाज) का भरपूर दुरुपयोग किया। जो नागरिकों का हनन उन्होंने तब शुरू किया वो ये आज तक चला रहे हैं लेकिन आज तक इण्डिया के राजाओं के साथ न तो राजनीतिक शिष्टाचार निभाया है और न ही इतने सालों की अन्ध गती के विषय में कोई वार्तालाप किया है। IPYadav ............